
मै प्रकाश की खातिर पूरी रात चलूँगा !!
मै प्रकाश की खातिर पूरी रात चलूँगामुझे नहीं आता है, कोरे स्वप्न सजानामै अपने मन की देखी साकार करूँगा माना हर एक कल्पना सत्य नहीं होती हर अभिलाषा, पूरी हो पाती ही कब है?सभी ओर अवरोध खड़े है भांति भांति के हर पगडंडी मंजिल तक जाती ही कब है?लेकिन मुझे न आता आधे में रुक जाना निकल पड़ा हूँ तो बाधांये पार करूँगा ऋतुएं भी बदलेंगी, अपने अपने क्रम से कभी मेघ गरजेंगे, सरिता इतराएगीधूप कभी अपना शारीर ही झुलसाएगीलौट पुनः दिन बासंती बेला भी आएगी मैंने कब सिखा है पीडा से डर जाना अभिसंघातो से, जीवन श्रृंगार करूँगा मेरा रहा असंभव से आकर्षण गहरा चाँद सितारों पर मेरा मन ललचाता है जाने क्यों, घनघोर तिमिर की छाया में भी मुझको आशा दीप, दूर से दिख जाता है मुझे नहीं आता अधियारे से घबराना मै प्रकाश की खातिर पूरी रात चलूँगा
मै प्रकाश की खातिर पूरी रात चलूँगामुझे नहीं आता है, कोरे स्वप्न सजानामै अपने मन की देखी साकार करूँगा माना हर एक कल्पना सत्य नहीं होती हर अभिलाषा, पूरी हो पाती ही कब है?सभी ओर अवरोध खड़े है भांति भांति के हर पगडंडी मंजिल तक जाती ही कब है?लेकिन मुझे न आता आधे में रुक जाना निकल पड़ा हूँ तो बाधांये पार करूँगा ऋतुएं भी बदलेंगी, अपने अपने क्रम से कभी मेघ गरजेंगे, सरिता इतराएगीधूप कभी अपना शारीर ही झुलसाएगीलौट पुनः दिन बासंती बेला भी आएगी मैंने कब सिखा है पीडा से डर जाना अभिसंघातो से, जीवन श्रृंगार करूँगा मेरा रहा असंभव से आकर्षण गहरा चाँद सितारों पर मेरा मन ललचाता है जाने क्यों, घनघोर तिमिर की छाया में भी मुझको आशा दीप, दूर से दिख जाता है मुझे नहीं आता अधियारे से घबराना मै प्रकाश की खातिर पूरी रात चलूँगा
No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.