Tuesday, July 21, 2009

यादें न जायेंगी !!


यादें न जायेंगीहम चले जायेंगेयादों की खुशबू सेमन महकाएँगे ।जब हम न होंगेराहों में तेरेकोई निशा जबनही होंगे मेरे ।तेरी निगाहे जबधुधेंगी मुझकोधड़कन भी तेरीजब पूछेगी मुझको ।कैसे समझाओगेख़ुद को बहलाओगेयादों के आँचल में मुझको तुम पाओगे ।यूं ही नया गीत गाता मिलूंगा यादों में तेरे मै हर पल रहूँगा ।

Tuesday, July 14, 2009

कैसे तुम्हें बुलाऊ


कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवरकैसे तुम्हे बुलाऊप्रेम भरे शब्दों में कितनीकोमलता मै लाऊकैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ डरता हूँ कही प्रेम गीत से कोमल मन न कुम्हालाऊ कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।कोयल की मै कूक ना जानूपपीहे की मै तेर ना जानूहर धड़कन में गीत है तेरे उन गीतों से तुम्हे बुलाऊकैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।रूप रंग सुंदर की तुम अमर कृति तुम अमर निशानी प्रेम की देबी प्रेम की मूरत तुम ही हो परियों की रानी तुम ही ho मेरी प्रेम कहानी ख्वाबो के स्वप्निल रंगों की तुम्हे चुनर पहनाऊ कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।पलकों में है ख्वाब तुम्हारे जब भी मिलते नैन हमारे छुई मुई सा मै शर्माऊदिल की बात मै दिल में छिपाऊ तुमसे मै कुछ कह नहीं पाऊं कैसे तुम्हे बताऊँ कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।नेह का बंधन स्नेह स्पंदन जीवन को करता मै अर्पण प्रेम का पुष्प chadaun कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ...........

न जाने क्या -क्या सोचता हूँ मै


न जाने क्यू ?तुम्हारे बारे में सोचना अच्छा लगता हैफिर वही पागलपन , फिर वही दीवानापनह्रदय को तरंगित कर गया ।सोचता हूँ की जब तुमसे मिलूंगातब सब कुछ कह दूँगा तुमसे एक ही साँस मेंतुम हसोगी मेरी दीवानगी पर, नादांगी परमेरा ह्रदय धड़क रहा होगातुम्हारी पलके मेरे चेहरे पर झुक रही होंगीऔर न जाने क्या -क्या सोचता हूँ मैतुम ये करोगी , तुम वो करोगीतुम सरमाओगी ,शायद मुझसे लिपट जाओगीमुझे गले से लगाओगीमेरा चेहरा अपने आँचल में छुपाओगीतुम मुझे अपने दामन से लगाओगीकोई मधुर गीत गुनगुनाओगीमुझे चाँद - सितारों में ले जाओगीऔर न जाने क्या -क्या सोचता हूँ मैआवारा बादलों की तरह , दीवानों की तरहऔर न जाने क्या - क्या सोचता हूँ मै ..............

पलकें भीग जाती है !


मैंने तुम्हे आत्मा की उन गहराइयोंसे प्यार किया है जहाँ मेरा मै खो जाता हैदुनिया का कोई भी ऐश्वर्य उसे छू नही पाता हैअलौकिक आनन्द का झरना मेरे ह्रदय में फूट पड़ता है ।तुम्हे इतनी गहराइयों से चाहा कीमेरा अहंकार न जाने कहा खो जाता हैसच कहूं मेरी आत्मा मुक्त हो जाती हैजैसे दुनिया कही खो जाती है ।तुझे प्यार कर के मेरी आंखों से आँशू छलक जाते हैमेरी दुनिया रंगीन हो जाती हैमेरा मन उमंग से नाच उठता हैसैकड़ों जूगनू जैसे मेरे आँगन में नृत्य करने लगते हैऐसा लगता है जैसे बसंत आ जाएजैसे अचानक हजारों फूल खिल जाएमेरा ह्रदय तुम्हारी खुशबू से खिल उठता हैमेरा जीवन आनन्द के फूलों से महक उठता हैमेरा जीवन एक उत्सव बन जाता है , गीत बन जाता हैमेरी आँखें झील बन जाती है और पलकें भीग जाती है