Tuesday, July 14, 2009

न जाने क्या -क्या सोचता हूँ मै


न जाने क्यू ?तुम्हारे बारे में सोचना अच्छा लगता हैफिर वही पागलपन , फिर वही दीवानापनह्रदय को तरंगित कर गया ।सोचता हूँ की जब तुमसे मिलूंगातब सब कुछ कह दूँगा तुमसे एक ही साँस मेंतुम हसोगी मेरी दीवानगी पर, नादांगी परमेरा ह्रदय धड़क रहा होगातुम्हारी पलके मेरे चेहरे पर झुक रही होंगीऔर न जाने क्या -क्या सोचता हूँ मैतुम ये करोगी , तुम वो करोगीतुम सरमाओगी ,शायद मुझसे लिपट जाओगीमुझे गले से लगाओगीमेरा चेहरा अपने आँचल में छुपाओगीतुम मुझे अपने दामन से लगाओगीकोई मधुर गीत गुनगुनाओगीमुझे चाँद - सितारों में ले जाओगीऔर न जाने क्या -क्या सोचता हूँ मैआवारा बादलों की तरह , दीवानों की तरहऔर न जाने क्या - क्या सोचता हूँ मै ..............

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