
कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवरकैसे तुम्हे बुलाऊप्रेम भरे शब्दों में कितनीकोमलता मै लाऊकैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ डरता हूँ कही प्रेम गीत से कोमल मन न कुम्हालाऊ कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।कोयल की मै कूक ना जानूपपीहे की मै तेर ना जानूहर धड़कन में गीत है तेरे उन गीतों से तुम्हे बुलाऊकैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।रूप रंग सुंदर की तुम अमर कृति तुम अमर निशानी प्रेम की देबी प्रेम की मूरत तुम ही हो परियों की रानी तुम ही ho मेरी प्रेम कहानी ख्वाबो के स्वप्निल रंगों की तुम्हे चुनर पहनाऊ कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।पलकों में है ख्वाब तुम्हारे जब भी मिलते नैन हमारे छुई मुई सा मै शर्माऊदिल की बात मै दिल में छिपाऊ तुमसे मै कुछ कह नहीं पाऊं कैसे तुम्हे बताऊँ कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ।नेह का बंधन स्नेह स्पंदन जीवन को करता मै अर्पण प्रेम का पुष्प chadaun कैसे तुम्हे बुलाऊ प्रियवर कैसे तुम्हे बुलाऊ...........
बस...मुस्कान बिखेरो, प्रियवर आ जाएंगे:-)
ReplyDeletesmile plz. narayan narayan
ReplyDeleteहिंदी भाषा को इन्टरनेट जगत मे लोकप्रिय करने के लिए आपका साधुवाद |
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