Wednesday, August 19, 2009

माँ


दुःख के छडों में तुम बहुत याद आती हो माँ !तुम्हारा चेहरा मेरी आखों में समां जाता हैमै महसूस करता हूँतुम्हार कोमल स्पर्श करुना से, स्नेह सेमेरे बालो में चलने लगता है .पीडा के अपार छडों मेंमेरा रोम रोम पुकार उठता है - माँ , माँजैसे मै प्रार्थना कर रहा हूँतब सागर से गहरा तेरा प्यारमेरा कवच बन जाता है ,तुम्हारी ममता का प्रसादमुझ पर बरसने लगता हैमेरा दर्द जैसे खोने लगता हैमै पुलकित होने लगता हूंमुझे न जाने क्यूतब ऐसा लगता हैजैसे मै तेरे आँचल में हूँतेरे आँचल में छुप करसारी दुनिया का गम भूल जाता हूँसारी ब्यथा , सारी पीडा सेमुक्त हो जाता हूँतेरे आँचल की पावन छायामेरा सौभाग्य बन जाती हैतब मेरा तन मानजीवन की परम धन्यता का अनुभव करता हैऔर मेरा अंतस अब ख़ुशी सेजैसे कोई गीत गा रहा है - माँ.माँ ..........

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