
कैसे वो पल थे
कैसे थे सपने
तुम थे तो सब कुछ था
आगन में अपने ।
सब कुछ सुहाना था
क्या वो जमाना था
हर पल ख़ुशी थी
हल पल थे अपने ।
तुम थे जो संग मेरे
सपने थे झरते
झिलमिल सितारे थे
पल पल मचलते
सारी फिजाएं थी
बाँहों में मेरे
सारा गगन था
आँगन में अपने ......
कैसे थे सपने
तुम थे तो सब कुछ था
आगन में अपने ।
सब कुछ सुहाना था
क्या वो जमाना था
हर पल ख़ुशी थी
हल पल थे अपने ।
तुम थे जो संग मेरे
सपने थे झरते
झिलमिल सितारे थे
पल पल मचलते
सारी फिजाएं थी
बाँहों में मेरे
सारा गगन था
आँगन में अपने ......
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