
कौन समझेगा मुझेकौन मुझे प्यार देगाजिस प्यार की तलाशमें हूँ बरसो सेक्या मुझे वो प्यारकभी मिलेगा ।इक धुंधली सी तस्वीरहै उसकी मेरे जेहन मेंकब तक मै उसकाइन्तजार करूँ ।कही वो मेराभरम तो नहीया है वो इक सच ।ये खुदा अब तूही बता क्यावो मेरे सामने आएगी ।और अगर वो नहीआएगी तो उसकीतस्वीर मेरे जेहन मेंक्यो है और मै क्योंउसके बारे में सोचता हूँअब तू ही बता -कौन समझेगा मुझेऔर कौन मुझे प्यार देगा ।(यह कविता मेरे प्रिय मित्र चंद्र शेखर द्वारा लिखी गई है और मुझेबहुत पसंद है , मुझे आशा है आप लोगो को भी पसंद आएगी )
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