
तेरे लबों की लाली को तुम आज कहो तो जाम बना दूँतेरे फलक की बिंदिया को तुम आज कहो तो चाँद बना दूँतेरे पायल की रुनझुन को तुमआज कहो तो गीत बना दूँ तेरे मचलते अरमानो कोआज कहो तो दुल्हन बना दूँ तेरे नयन की गहराई कोआज कहो तो झील बना दूँतेरे उदासी के साए को आज कहो तो उत्सव कर दूँतेरे जीवन के अंधियारे कोआज कहो तो उज्वल कर दूँ तेरे अधूरे सपने को तुम आज कहो तो पूरा कर दूँ तुम यदि आज कहो तो मैंपतझड़ को सावन कर दूँअमावास को पूनम कर दूँनदियों को सागर कर दूँसोला को सबनम कर दूँधरती को जन्नत कर दूँतुम यदि आज कहो तो मैं तुम पर जीवन अर्पण कर दूँ
No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.